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हा ! हा ! हा ! .... राख में भोजन ?
ये दो बच्चियाँ नासमझ हैं ...भला इन्हें क्या मालूम कि भोजन तो कल रात को मेरे पड़ोस में हो रही शादी में बची झूठन के ढेर में पड़ा था ।
खुशनुमा दौर में जवां रंगों की आजमाइश करने की एक छोटी सी शुरुआत मैं कर रहा हूँ। यह कोशिश है..जानने की कि आख़िर जवां रंग होते कैसे हैं ? जवां रंग सोचते क्या हैं ? उनके दिमाग में कौनसे मुद्दे तैरते रहते हैं ?

1 comment:
Its quiet good to see someone thinking for all these issues. But dear extend ur start to more media types. Blog is just a start so keep doing the good work. Hum sirf jawan nahi hai hum desh ki jaan hai or desh humari................
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