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हा ! हा ! हा ! .... राख में भोजन ?
ये दो बच्चियाँ नासमझ हैं ...भला इन्हें क्या मालूम कि भोजन तो कल रात को मेरे पड़ोस में हो रही शादी में बची झूठन के ढेर में पड़ा था ।
खुशनुमा दौर में जवां रंगों की आजमाइश करने की एक छोटी सी शुरुआत मैं कर रहा हूँ। यह कोशिश है..जानने की कि आख़िर जवां रंग होते कैसे हैं ? जवां रंग सोचते क्या हैं ? उनके दिमाग में कौनसे मुद्दे तैरते रहते हैं ?
