Wednesday, February 18, 2009

दुनिया सिर्फ़ आप के सोचने जैसी ही नहीं है ...

कचरे के ढेर में ये अश्वेत गुडिया किसकी है ? बाकि बच्चियाँ तो अपने-अपने घरों में बैठी महँगी गुडियाओं के साथ खेल रही है ।


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हा ! हा ! हा ! .... राख में भोजन ?
ये दो बच्चियाँ नासमझ हैं ...भला इन्हें क्या मालूम कि भोजन तो कल रात को मेरे पड़ोस में हो रही शादी में बची झूठन के ढेर में पड़ा था ।

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पानी तो मुंबई , न्यूयार्क , लन्दन , दुबई और फ्लोरेंस जैसे बड़े - बड़े शहरों में बने बड़े - बड़े स्वीमिंग पूलोंमें बहुत है .........फिर ये खली डब्बों की कतार क्यों भला ?

बच्चे भगवन का रूप होते हैं । ये बच्चे क्या है भला ?